वो चम्पाकली, तेरी आँखों को अपना बना लेंगे,
बस शर्म का पर्दा गिरा दे तू, काजल लगा देंगे।
यूँ ही देखा कर दर्पण, तू सुबह-सुबह उठ के,
नस – नस में तेरे, रातों को अंगार जला देंगे।
परमीत सिंह धुरंधर
वो चम्पाकली, तेरी आँखों को अपना बना लेंगे,
बस शर्म का पर्दा गिरा दे तू, काजल लगा देंगे।
यूँ ही देखा कर दर्पण, तू सुबह-सुबह उठ के,
नस – नस में तेरे, रातों को अंगार जला देंगे।
परमीत सिंह धुरंधर