एक फूल तो मेरे आँगन में रख


तू दरिया – दरिया आके मुझसे तो मिल,
मैं सागर – सागर तेरी मोहब्बत में चख लू.
तू एक फूल तो मेरे आँगन में रख,
मैं तेरे लिए सारा मरुस्थल सींच दूँ.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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