त्रिया-चरित्र


गली – गली में देखा तुझको,
गली – गली में शोर है.
सैयां मेरी आँखों को,
तू लग रहा एक चोर है.
कल से गायब मेरी चुनर हैं,
और चोली भी तंग है.
सैयां मेरी आँखों को,
तू लग रहा एक चोर है.
तू तो हो गयी है वावरी,
उस पड़ोसन की सुन – सुन के.
उसके त्रिया-चरित्र का,
ये सब एक नया झोल हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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