हिंदी दिवस और खत्री को प्रेम निवेदन


हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पे दोस्तों ने पकड़ लिया. सब हंस कर कहने लगे तो भाई कुछ करोगे की नहीं हिंदी के सम्मान में.
मैंने कहा, “हम क्या कर सकते हैं? ज्यादा से ज्यादा किसी को अपना प्रेम निवेदन कर सकते हैं हिंदी में.”
हमने कॉलेज की सबसे सुन्दर लड़की अरुणा खत्री को कॉलेज के गेट पर ही सुबह – सुबह घेर लिया। अरुणा खत्री सुन्दर, तेज, हाजिर जबाब के साथ – साथ शातिर और चालक थी. बाज की नजर और खत्री की नजर से कबूतर से लेकर कॉलेज के लड़के तक डरते थे. ऐसे में वहाँ तुरंत भीड़ लग गयी की भाई किसकी इतनी हिम्मत की खत्री को पकड़ लिया, वो भी वैलेंटाइन डे पे नहीं पकड़ के हिंदी दिवस पे.  बहुत बिनती करने, पैर पकड़ने पे भी खत्री का दिल नहीं पसीजा। अंत में पता नहीं खत्री को क्या हुआ. वो थोड़ी आवाज मीठी करके, आदाओं पे इठलाती हुई बोली, “क्यों तुम्हे स्वीकार करूँ मैं?” मैंने कहा, “मैं तुम्हे दिमाग से बहुत पसंद करता हूँ. मैं तुम्हे अपना दिमाग देना चाहता हूँ.” जीवन में पहली बार किसी ने आज दो साल में, कालेज में खत्री के दिमाग पे जोर डाल दिया था. उसने बोला, “क्या मतलब? लोग दिल देते हैं प्यार में और तुम दिमाग दोगे। कैसे?” मैंने कहा, “अपनी शादी हो गयी तो आपके बच्चों में दिमाग 5०% मेरा होगा।” उसने गुस्साते हुए कहा, “सिर्फ मेरे बच्चे, तुम्हारे नहीं।” मैंने कहा, “अरुणा, शादी के बाद तुम अदालत से बच्चों का हक़ नहीं मांगोगी, क्या तलाक के बाद? अगर तब उन्हें तुम अपना कहोगी तो आज क्यों नहीं?” खत्री ने आँखे तैराते हुए कहा की अब तो वो बिलकुल नहीं शादी करेगी उससे जो तलाक की बात करता है. मैं, ” अरे यार खत्री, ये गजब हैं लिविंग रिलेशन जब चाहे छोड़ दो पर तलाक को क्यों गलत मानते हो फिर. पर खत्री टस से मस ना हुई. अंत में हार कर मैंने कहा, “यार तो २5% दिमाग ले लो.” वो बोली, ” वो कैसे?”  मैंने कहा की अपने बच्चों की शादी करेंगे। पता नहीं उसको क्या जच गया, वो मान गयी. दोस्तों ने पूछा तो मैंने कह दिया उसने स्वीकार कर लिया मेरा प्रेम निवेदन की हम लोग शादी करेंगे। दोस्त बोले, “शादी!” मैंने कहा, “हाँ, वो तैयार है, हामरे बच्चों की शादी के लिए”. और सारे कॉलेज में ये बात फ़ैल गयी. इस तरह वो हिंदी दिवस, हंसी दिवस में बदल गया.

 

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment