खत्री भी घायल है


लूट लेंगे रानी, तेरी जावानी के भार को,
कब तक संभालोगी, इस कच्ची कमान को.
हम भी हैं गावँ के, मिटटी में खेले हैं,
चित कर देंगे तुम्हे, बस लग जाने दो एक दाव तो.
लूट लेंगे रानी, तेरी जावानी के भार को,
कब तक संभालोगी, इस कच्ची कमान को.
सबकी नजर है, सबको खबर हैं,
खत्री भी घायल है, देख तेरे अंग – अंग को.
लूट लेंगे रानी, तेरी जावानी के भार को,
कब तक संभालोगी, इस कच्ची कमान को.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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