जवानी


जवानी थी,
तो किसी बेवफा,
के पीछे बरबाद कर दी.
अब तन्हाई और बुढापे में,
बाप और उनकी सीखें,
याद आती हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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