रिश्तों को ऐसे न तोडा कीजिये,
छोटा शहर है, न छोड़ा कीजिये।
बड़े शहर में बिखर जाओगे,
भीड़ है इतनी की पिछड़ जाओगे।
फिर याद आएगी मेरी चुनरियाँ।
रिश्तों को ऐसे न तोडा कीजिये,
छोटा शहर है, न छोड़ा कीजिये।
अभी पैसों की चाहत है, समझ नहीं पाओगे,
काँटों में फंस के, उलझ जाओगे।
फिर याद आएगी मेरी नगरिया।
रिश्तों को ऐसे न तोडा कीजिये,
छोटा शहर है, न छोड़ा कीजिये।
यहाँ माँ है, ममता है, हैं बगीचे हरे- भरे,
जब ठोकरों में होगी तुम्हारी जिंदगी,
याद आएगी तब मेरी नजरिया।
रिश्तों को ऐसे न तोडा कीजिये,
छोटा शहर है, न छोड़ा कीजिये।
परमीत सिंह धुरंधर