मठ्ठा सैंया


काट ल दही परके छाली सैंया,
ना त महला पे मिली मठ्ठा सैंया।
छोड़ द सबके दुआर अगोरल,
भूल जा राति के बथानी में पसरल।
लूट जाइ थाती त बस बाची टूटल ठाटी सैंया।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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