औरत – मर्द


वो जो कल तक,
मेरी किस्मत बदलना चाहती थी,
अब अपना घर बदल रही हैं.
मर्द बस बदनाम हैं इस बाजार में,
गली – गली में औरत अपना बिस्तर,
बदल रही है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment