नादाने – दिल को संभालो यारों,
की दरियाँ में आग लग रही है.
प्यास है की मेरी मिटती नहीं,
और वो अपने वक्षो पे चोली कस रही हैं.
बस दो घड़ी का ही है प्यार उनका,
जिसकी कसमे को वरसों से खाती थी.
की अभी जी भर के चूमा भी नहीं,
और वो अपनी अंगिया पहन रही हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
Very bold and beautiful
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