हुस्न


वफाये – मोहब्बत, हुस्न के आँचल में तो ना देख,
इनके अंगों पे ठहरता इनका आँचल भी तो नहीं।
दरिया की मिठास वही मुसाफिर याद रखते हैं,
जिनका घर कभी किनारों पे बसा ही नहीं।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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