इंसान बनने का मजा ही कुछ और है


शौक मुझे भी है की खुदा बनू,
मगर इंसान बनने का मजा ही कुछ और है.
ताकत के बल पे,
तो शैतान भी दुनिया को अपना बना ले.
मगर संघर्ष और बुलंद इरादों का नशा,
ही कुछ और है.
मैं मौन हूँ,
ये मेरी कमजोरी नहीं।
सपनों को सीने में दबाने का,
मजा ही कुछ और है.
ये निश्चित है की एक दिन,
तुम्हे कसूँगा अपनी इन बाहों में.
मगर जवानी में तनहा विरह की आग में,
जलने का नशा ही कुछ और है।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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