इश्क़


इश्क़ क्यों बदले?
अंदाजे-गुरुर को.
ये उनकी चोली नहीं,
जो फिसल जाती है,
हर रात को.
जिस्म को पा लेना ही,
बुलंदियों का नाम नहीं।
वार्ना युद्ध होते हरम में,
और सुरमा पैदा होते,
हर एक रात को.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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