संघर्ष ही मेरा उद्देश्य है


मुझे हार बर्दास्त नहीं,
और जीत की कोई चाह नहीं।
संघर्ष ही मेरा उद्देश्य है,
जब तक मंजिल,
आ जाती मेरे पास नहीं।
तारो-चाँद से, ये माना,
की किस्मत का है लेना – देना।
मगर मेरे हौसलों पे,
इनकी गति का कोई असर नहीं।
हर चट्टान मैं तोड़ दूंगा,
अगर वो मेरे राहों में आये.
उबड़-खाबड़ राहों के बिना,
मिलती धरा को कभी प्रवाह नहीं।
संघर्ष ही मेरा उद्देश्य है,
जब तक मंजिल,
आ जाती मेरे पास नहीं।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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