आँखें तुम्हारी बड़ी बड़ी,
ये जुल्फे बिखरी सी l
क्या बात है हुस्न का तुम्हारे सनम,
हर दिल में तुम्ही उतरी सी l
है नशा जो तेरी आँखों में,
हम मयखाने में क्यों जाये l
है वफ़ा जो तेरी साँसों में,
हम पैमाना क्यों छलकाए l
तुमको पिलाना है पिला दो
मदहोश बनाना है बना दो l
तुम्हारे खूबसूरत जिस्म पे,
लहराता हुआ आँचल,
पागल करता है हमें,
तुम्हारी जुल्फों का बादल l
तुम्ही हो जब सावन की बदली,
हम कहीं और क्यों भींग जाए l
है वफ़ा जो तेरी साँसों में,
हम पैमाना क्यों छलकाए l
दिल में आग सी आप बसे हो,
कल नहीं आज नहीं बरसो से छुपे हो l
जब नाम आपका है गुनगुनाने को,
हम कोई और नगमा क्यों गाए l
परमीत सिंह धुरंधर