Dream


For your dream, You have to die.

 

Parmit Singh Dhurandhar

हुस्न


नजाकत जहाँ हया छोड़ दे,
हया जहाँ वफ़ा छोड़ दे.
वो महफ़िल हैं दौलत की,
जहाँ हुस्न वादे-इरादे, इश्क़ छोड़ दे.

 

परमीत सिंह धुरंधर

When you are not with me


I don’t like the dark night,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.
I cannot imagine life,
When you are not with me.
ये काली – काली रातें,
कैसे काटूंगी।
जो तुम ना मिले मुझको,
तो मर ही जाउंगी।
I don’t like my lips,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.
I just want to die,
When you are not with me.
I don’t like to lie,
But it is true.
I don’t like to die,
But I have to.
I don’t like the dark night,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.
प्यासी हूँ मैं प्यासी,
तेरे होंठों की.
जो तू ना मिला मुझको,
तो मर ही जाउंगी।
I don’t like the dark night,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.

 

Parmit Singh Dhurandhar

तुम मिल जाओ तो


जले रे मनवा,
जले रे तनवा।
तुम मिल जाओ तो,
छा जाए मेघवा।
बरसों से सुखी जमीं हैं,
बरसों से तपती जमीं हैं.
तुम मिल जाओ तो,
बरस जाएँ मेघवा।
पक्षी सारे उड़ गए,
पौधे सारे सुख रहे.
तुम मिल जाओ तो,
थिरक उठें मोरवा।

 

परमीत सिंह धुरंधर

पशु – पक्षी


जब तक आसमान तुम्हारा है,
तुम पशु नहीं हो.
जिस दिन से जमीन तुम्हारी हैं,
तुम पक्षी नहीं हो.

 

परमीत सिंह धुरंधर

Give me life


Take me wherever you want baby,
I just want you.
Nothing else can make me happy,
I just want your soft touch.
No life beyond this dream,
Give me life by your hot breath.
Just keep me in your arms baby,
I just want you.
There is no soul,
Without these feelings.
There is no world,
Without these eyes.
Just be in my arms baby,
I just want you.

 

Parmit Singh Dhurandhar

नारी का संग होना भी क्या होना?


बुद्ध छोड़ गए यशोधरा को,
दिव्या – ज्ञान की खातिर।
राम लड़ गए रावण से,
एक सीता की खातिर।
कृष्णा भूल गए गोकुल – संग,
राधा की अटखेलिया,
बस एक युद्ध की खातिर।
लक्ष्य जीवन का साधित होगा साथी,
चाहे नारी हो या नारी संग में न हो.
जीवन तो तुच्छ हैं,
इसे क्या भोगना।
जिसका जीवन ही भोग – विलास हो,
उस नारी का संग होना भी क्या होना?

 

परमीत सिंह धुरंधर

बहू हमारी रजनी कान्त


बहू हमारी रजनी कान्त,
पकड़ लेती है सबके कान.
करती है ऐसे – ऐसे काम,
कसी रहती है,
हमेसा सास- ननद पे लगाम।
घर में विजली सी चमकती,
प्रेम में शहद सी घुलती।
सर-दर्द में, बन जाती है,
ठंढा -ठंढा बाम.
बहु हमारी रजनी कान्त,
पकड़ लेती है सबके कान.

 

परमीत सिंह धुरंधर

This is written for the TV serial Bahu Hamari Rajni Kaant which is running currently on Life OK channel.

http://www.desiserials.tv/watch-online/life-ok/bahu-hamari-rajni-kant-life/

हुस्न


हर फैसला लेती हैं,
लड़कियां,
सूरत और जेब का भार,
देख कर.
और कहती हैं की,
वो दिल ढूंढ रही हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

किन दीवारों पे लिखूं तेरा नाम?


किन दीवारों पे लिखूं तेरा नाम?
मुझे नहीं पता.
हर दीवार,
अब दुश्मन की सरहद में है.
इश्क़ इस कदर मुझे तन्हा कर देगा,
नहीं जाना था.
क्यों की मेरी हर साँस,
अब उनके गिरफ्त में हैं.
मेरी आँखे, रोशनी नहीं,
तेरा दीदार चाहती हैं.
इन्हें अब तक ये नहीं पता,
की तेरा जिस्म अब गैरों की बाहों में हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर