दिल तो अभी भी जवानी लिए हैं,
कमर ही बस झुकी है रानी।
रौशनी निगाहों की कम हुई है,
साँसे तो आज भी है तूफानी।
परमीत सिंह धुरंधर
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दिल तो अभी भी जवानी लिए हैं,
कमर ही बस झुकी है रानी।
रौशनी निगाहों की कम हुई है,
साँसे तो आज भी है तूफानी।
परमीत सिंह धुरंधर
Parmit Kumar Singh
लाल साड़ी में आपको देख के,
दिल तो बईमान हो गया हैं.
हम ही अभी तक,
इस ईमान को थामे बैठे हैं.
ये जानते हुए की आप,
किसी और की हो रही हो,
जाने क्यों आपका आँचल पकड़े बैठे हैं.
जाने किस्मत में क्या लिखा है,
और आप कितना समझोगी,
मगर हर रात,
आपके लिए दिया बुझा के बैठे हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
ए रात इतना भी क्या शर्माना मुझसे,
आज भी तुम्हारे सितारों की चमक मुझसे हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
जमीन नयी हो तो निगाहें पड़ ही जाती हैं,
रिश्ते चाहे कितने ही करीब हो, दरार आ ही जाती हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
रहनुमाओं की खोज में, हसरतें जवाँ हो गयी,
जवानी के जोश में हम तनहा रह गए.
कब तक उछालोगे ये आज़ादी का जश्न,
सबको खबर हो चुकी है, ये रात हमें खोखला कर गयी.
और बेइंतहा मोहब्बत करते थे सितारों से हम,
अमावस की रात को, कत्ले-आम मच गयी.
अब ना हम हैं, ना वो हैं, ना जवानी का वो गुरुर,
मुफलसी है, तन्हाई है, और थोड़ी साँसे बच गयी.
परमीत सिंह धुरंधर
तेरी चाल पे तो तख्ते-ताज पलट गए,
ये हम हैं जो फिर भी संभल गए.
तुझे पाने को बाह गयी खून की नदियां,
जाने कैसे इस सैलाब से हम निकल गए.
परमीत सिंह धुरंधर
तेरी जुल्फों में सोया करता था,
अब तन्हा-तन्हा फिरता हूँ.
बहुत मगरूर था जिस मोहब्बत पे,
अब उसी का मातम करता हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर
उम्र ऐसे ये ढलने लगी हैं,
मेरी नजर तेरे सीने पे लगी है.
कभी मुझसे भी आके मिल, ए जालिम,
मोहब्बत अब अगन बन गयी है.
तेरी मंजिल मेरी ये तड़प हैं,
मेरी चाहत है पाना तुझे।
अपनी ये जिद छोड़ भी दे, ए जालिम,
जिंदगी अब कहर बन गयी है.
लगेगी रोज भीड़ तेरी दीदार पे,
जिंदगी है तनहा ये बिना तेरे श्रृंगार के.
पर्दा ये अब हटा भी दे, ए जालिम,
दुरी ये अब जहर बन गयी है.
परमीत सिंह धुरंधर
तेरी आँखों का कालापन,
मेरे मन का कुँवारापन।
एक है सागर की गहराई लिए,
और एक में, दहकते रेगिस्तान का सूनापन।
तेरी योवन का ये अकेलापन,
मेरे मन का ये बंजारापन।
एक है हिमालय सा उन्नत,
और एक में अनंत बसा ये खालीपन।
परमीत सिंह धुरंधर