प्रेम और प्रेमा


प्रेम: मुझ इस बात का अफ़सोस नहीं की तुम मुझसे प्यार नहीं करती। बल्कि इस बात की ख़ुशी है की तुम बिना प्यार के भी मेरे साथ रहती हो.
प्रेमा: मैं इसलिए तुम्हारे साथ नहीं रहती की तुम्हे ख़ुशी मिले, न ही मैं इसलिए तुम्हे छोड़ के नहीं जा रही की तुम्हे दुःख होगा। मैं इसलिए तुम्हारे साथ हूँ क्यों की मैं जिंदगी को समझती हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मते-दर्जी


दिल कब का टूट कर, समुन्दर में बह गया,
वो अब तक दरिया में प्यार ढूंढती हैं.
इश्क़ का मेरा चूल्हा, जल कर कब का बुझ गया,
और वो अब तक सिलवट पे सरसो पिसती हैं.
निगाहों में उनके हैं कितने ही परदे,
कोई हाय, शर्म, लज्जा तो कोई मोहब्बत कहता हैं,
जब भी देखता हूँ इन पर्दों के अंदर,
बस सोना, चांदी और पैसों का चमक दीखता हैं.
कौन कहता है की मोहब्बत दिलवालो का खेल हैं,
आज भी उनका दुपट्टा कहीं और,
तो कमीज, कहीं और ही सिलता है.

परमीत सिंह धुरंधर

ब्रह्मचर्य और नारी


अगर ब्रह्मचर्य से ही परमानन्द की प्राप्ति होती, तो खच्चर यूँ धरती पे बोझ न ढोता। और, अगर एक नारी एक नारी का दर्द समझ सकती तो टाइगर वुड्स को दुबारा प्यार नहीं प्राप्त होता।

परमीत सिंह धुरंधर

चाय का प्याला हूँ


प्यासा, प्यासा, प्यासा, प्यासा हूँ,
तेरी चाहत में एक तमाशा हूँ.
गैरत मेरी, तो कब की खो गयी,
अब तो बस, एक चाय का प्याला हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

आग बथान के


ललुआ भइल, भलुआ भइल,
पर बारु अभी भी कमाल के.
आव अ न रानी, खाल अ ना रानी,
मरई में, आज हमरा साथ में.
आँगना में त अ ओसा पड़ी,
आग ई ले जा, तू आज, बथान से.
पोता भइल, नाती भइल,
पर लागेलू अभी भी सोलह साल के.
आव अ न रानी, बैठ अ ना रानी,
कम्बल में पाँव डाल के.
आँगना में त अ ओसा पड़ी,
आग ई ले जा, तू आज, बथान से.

परमीत सिंह धुरंधर

तालाब पे – 2


पंडित विद्वान हो,
वेद में प्रकांड हो,
औरत, के लालच छूटे ना.
तनी दूर रही राजा जी,
बैर अभी ई टूटी ना.
भांग होली के,
योवन चोली में,
छुपाईला से, कभी छुपे ना.
एक बार नहा ल,
तालाब पे गोरी।
मौसम फिर अइसन, आई ना.

(She is not believing his love. He says that you would miss this love in your old age.)

परमीत सिंह धुरंधर

तालाब पे


गोरी देहात के,
आटा जाँत के,
छूटे न मुह से.
तनी दूर रही राजा जी,
बैर अभी ई टूटी ना.
बोली हजाम के,
घोड़ी लगाम पे,
रोकलो कोई से, रुकी ना.
एक बार नहा ल,
तालाब पे गोरी।
मौसम फिर अइसन, आई ना.

(She is not believing his love. He says that you would miss this love in your old age.)

परमीत सिंह धुरंधर

झुमका ला दीं


झुमका ला दीं, हँसुली ला दीं,
तनी बोलअ ना रानी, हंस के.
रोटी बनैले बानी,
तहरे खातिर घी घस के.
दिल्ली घुमा दीं, बॉम्बे घुमा दीं,
तनी बैठअ ना रानी, सट के.
छोड़ के बथान, तहरे खातिर,
खटिया डल्ले बानी आज घर में.
पैर दबा दीं, हाथ दबा दीं,
तनी आवअ ना रानी, सज के.
मूड बनैले बानी तहरा खातिर,
आज रम से.

परमीत सिंह धुरंधर

दिया


बदलते वक़्त ने हँसना सीखा दिया!
हँसते वक़्त ने बदलना सीखा दिया…..
और ऐसा है साथ मेरे दोस्तों का
अंधेरों में हर दिया जला दिया.

by my one well wisher

कभी फिर


तुम ऐसे मिले मुझसे,
की नजरे हटी न कभी फिर.
तन्हा-तन्हा सा रहता हूँ,
नींदे आयीं न कभी फिर.
अच्छा है की हम्मे ये दूरी है,
मेरी भी मज़बूरी है.
तुम जो अपने पास होते,
हम सो न पाते कभी फिर.

परमीत सिंह धुरंधर