किसी और की नाराज़गी से,
इंसान बंदगी तो नहीं छोड़ सकता।
मोहब्बत पे मर मिटने वाला,
आशिकी तो नहीं छोड़ सकता।
वो और हैं जिससे मोहब्बत पसंद ना होगी,
उनसे सहम कर धुरंधर सिंह,
अपनी दीवानगी तो नहीं छोड़ सकता।
Tag: Love
रिश्ते
वो क्या मेरे दर्द को समझेंगी जो दिलो से खेलती है,
प्यार
प्यार तभी सफल हो सकता है जब आप संत बन जाये, परमीत.
सैया
सैया देलन एगो गुलाब अंखिया से अंखिया लड़ाके,
फिर त अ सो नहीं पायी मैं, बहियाँ में उनके जाके।
सखी कैसे कहीं सब बात, सब लूटा देहनी होश गवां के।
ना मैं कुछ बोल पायी, ना आँखे खोल पायी,
भाया तो मुझे कुछ नहीं पर ना मैं परमीत को रोक पायी।
सैया पहनाने लगे चूड़ी अंखिया में अंखिया डाल के,
फिर सो नहीं पायी मैं, बहियाँ में उनके समा के।
नथुनिया
कह अ न परमीत तानी अंखिया से,
केने-केने धोती खुलल रतिया में.
मत पूछ अ रानी इह बतिया रे,
बड़ा गजन लिखल रहल देहिया के.
नशा अइसन रहल की होश गवा देहनी,
अखियाँ खुलल त अ रहनी खटिया पे.
रात भर में लूट गइली सारा जोगवाल थाती,
बस रह गइल एगो नथुनिया रे.
तड़का
अभी रात मेरी बाहों में थी,
की सुबहा आके छनकने लगी.
मीठे-मीठे ख़्वाबों में धुरंधर के,
हकीकत का तड़का लगाने लगी.
नथुनिया दिलाई ना
तानी दूर-दूर से ए बालम धुरंधर जी,
नयनन में प्यार जगाई ना,
खेत कहीं नइखे भागल जात,
कहियो आँगन में खाट बिछाई ना.
कब तक बहेम खुदे बैल नियर,
कभी हमके भी छपरा घुमाई ना.
चूल्हा-काठी करत, हमार कमर टूट गइल,
गेहूं-धान बोआत, राउर उम्र हो गइल,
कब तक करेम इह दुनियादारी,
कभी गंगा में भी संगे नहाईं ना.
अरे बबलू बो, गुड्डू बो के, देख के जियरा जले,
एगो बालम के कमाई पे, रोजे सजाव दही कटे,
दौलत बचा के का होइ,
कभी एगो नथुनिया, हमें दिलाई ना.
प्यार
मैं दिल को ये कहने लगा हूँ की,
प्यार झूठा होता है, और
धुरंधर ये जूठ बोलने लगा है.
कंगन मैंने खरीदे हैं
इम्तहान मेरे जीवन की,
कब होगी मेरे ईस्वर,
मैने उनको चुन लिया है,
वो कब चुंनेंगी ईस्वर।
हाथों में चूड़ी है,
आँखों में काजल,
कानो में कुण्डल है,
पावों में पायल,
की कंगन मैंने खरीदे हैं,
वो कब पहनेंगी मेरे ईस्वर।
इम्तहान मेरे जीवन की,
कब होगी मेरे ईस्वर,
मैने उनको चुन लिया है,
वो कब चुंनेंगी ईस्वर।
बादल बरसते कितने मिलें,
उपवन में कितने ही फूल खिलें,
जो मन को मेरे छू ले,
वो कहाँ है शूल,
ह्रदय-आघात तो बहुत मिलें,
वो कब हृदय को सिचेंगी मेरे ईस्वर।
इम्तहान मेरे जीवन की,
कब होगी मेरे ईस्वर,
मैने उनको चुन लिया है,
वो कब चुंनेंगी ईस्वर।
राते जब आ-आके,
करती हैं मुझसे बाते,
तो सीने में उठती हैं,
लाखो जज्बातें,
की बासुरी तो बजा दी है प्रेम की,
धुरंधर ने,
वो मीरा बनके कब नाचेंगी मेरे ईस्वर।
इम्तहान मेरे जीवन की,
कब होगी मेरे ईस्वर,
मैने उनको चुन लिया है,
वो कब चुंनेंगी ईस्वर।
दिलरुबा
अभी- अभी तो दिल तोड़ा है,
तेरे नैनों के मयखाने में.
फिर क्यों पूछती हो दिलरुबा,
हाल मेरा इस जमाने से.
बदल लिया है परमीत ने धड़कनो को,
तेरी खुशियों की खातिर.
फिर क्यों हो इतनी आतुर,
आने को मेरे जनाजे में.