आव अ उघार दीं,
चोली ए रानी,
आव अ उघार दीं चोली।
फेन पहन ली ह अ भिनसहरा,
जाएब हम जब कोतवाली।
आव अ उघार दीं,
चोली ए रानी,
आव अ उघार दीं चोली।
इहाँ ना कोई हाड्डा आई,
ना तितैया ही कोई काटी।
मत डर अ तू,
हम करेम रात भर रखवाली।
आव अ उघार दीं,
चोली ए रानी,
आव अ उघार दीं चोली।
परमीत सिंह धुरंधर