सब कुछ छुपा के भी कत्लेआम कइले बारु


पटाखा भइल बारु, पटाखा भइल बारु।
जोबना तहार अइसन, घटा भइल बारु।
एके ही चोलिया के सीए दस बार हो,
जैसे दरजी पिए महुआ रसदार हो.
सब कुछ छुपा के भी कत्लेआम कइले बारु,
छोटका उमरिया में ही घाव कइले बारु।
छपरा – से – मलमलिया एके दिन त कइलू,
लहरा के अचरिया रहिया में आपन,
सबके कलेजा मोह लेले बारु।

This is about a girl who is so beautiful that she is unable to go out. Just one day she went out and the whole word fell for her beauty.

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment