जब तक गुनाह नहीं होगा


जब तक गुनाह नहीं होगा,
कोई तुम्हारा अपना रिस्तेदार नहीं बनेगा।
ये वक्त ही ऐसा है दोस्तों,
जिन आँखों के लिए जी रहे हो,
वक्त आने पे,
वो भी तुम्हारा पहरेदार नहीं बनेगा।
जिस्म की भूख तो गौरेया को भी होती है,
पर शर्म की देवियों से नीचे,
कोई परिंदा भी नहीं गिरेगा।

परमीत सिंह धुरंधर

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