चुनर सरक जाए


अंखिया -से – अंखिया ऐसे मिलाव गोरी,
ताहर चुनर सरक जाए, और उड़ जाए मेरी नींद गोरी।
देहिया – के – देहिया के पास, अतना लाव गोरी,
की ताहर कंगन खनक उठे, और हमार दिल गोरी।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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