शहर


बहुत कम होते हैं,
जिन्हें अपने शहर में,
मिलता है मौक़ा -इश्क़ का.
आपने वहां शिविर डाला है,
जो शहर ही है, मेरे इश्क़ का.

 

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment