मेरे पिता हैं शालिग्राम


अगर जीवन है एक संग्राम,
तो मेरे पिता हैं शालिग्राम।
जाने वो कौन सा एक पुण्य था,
जो मुझको मिला ये धाम.
कोई त्रिस्कार, कोई पुरस्कार,
अब मायने नहीं रखता।
इस रक्त से प्रवाहित मस्तक पे,
अब कोई और ताज नहीं शोभता।
अगर साँसों का होना है,
ब्रह्म के होने का प्रत्यक्ष प्रमाण,
तो मेरे पिता हैं उन वेदों का समस्त ज्ञान।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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