मुकाम


जो अपनी निगाहों से अनदेखा करते हैं हमें,
हम तो उन्हें ही बस देखा करते हैं।
मोहब्बत उस मुकाम पे है मेरी कि बस,
तन्हाई में शहनाई सुना करते हैं।

ख़ामोश लम्हों में उनका नाम लिया करते हैं,
दिल की हर धड़कन को उनसे जोड़ा करते हैं।
वो पास हों या दूर, क्या फ़र्क पड़ता है?
हम तो हर ख़्वाब में उन्हें जिया करते हैं।

रातों की चादर में उनकी यादें सजी रहती हैं,
आँखों में तस्वीर उनकी बसी रहती है।
क़िस्मत से मिले या ना मिले वो कभी,
हम तो हर दुआ में उन्हें माँगा करते हैं।

RSD