किसी भी हुस्न में ऐसी विरह की आग नहीं


हम चाहें हुस्न वालों को,
मेरी ऐसी औकात नहीं।
सीधे -सादे इंसानों के लिए,
हुस्न के पास कोई सौगात नहीं।
इससे अच्छा की लगा दे जिंदगी,
अगर खुदा की राह में,
तो कोई बरक्कत हो जाए.
मक्कारी के अलावा,
हुस्न की झोली में कुछ भी नहीं।
कल रात मेरी कलम ने मुझसे कहा,
२५ दिन हो गए,
तुमने मुझे छुआ तक नहीं।
किसी के जिस्म को क्या छुऊँ?
किसी भी हुस्न में,
ऐसी विरह की आग नहीं।

 

परमीत सिंह धुरंधर

There is no desire left for you as my brain feels attraction for creativity and simplicity.

तुम्हारी आँखे


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मेरे इरादे बदल देतीं हैं तुम्हारी आँखे,
मेरे सपने सजा देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
दूरियां जो हैं हमारे दरमियाँ,
उसे कितना छोटा बन देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
सम्पूर्ण से लगते इस जीवन को,
तुरंत, एक पल में, अधूरेपन का एहसास,
दिला देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
कितना भी मयखाने से पी लूँ, उठाकर,
सीने में प्यास जगा ही देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
तुम ज्वाला बनके धधकती रहो,
जलाती रहो, मिटाती रहो.
बस यूँ ही कभी-कभी,
हमसे लड़ा लो तुम्हारी आँखे।

 

परमीत सिंह धुरंधर

Its your eyes, which is keeping me alive. Its your eyes which makes me to try for my dream. Its your eyes which makes me to feel your breath, your closeness. All my feelings, my desire and my energy is due to your eyes. Its only your eyes …only your eyes….that is my life……

Crassa और Jwala


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Crassa और Jwala की जोड़ी कैसी,
बिना आँखों में कोई शर्म के,
बस मस्ती ही मस्ती।
तो धधकने दो, ज्वाला को यूँ ही.
पसीना बहा देंगे मंजिल के लिए,
खून का कतरा, आँखों में छलक आये.
तो भटकने दो, Crassa को यूँ ही,
बस्ती ही बस्ती।

 

परमीत सिंह धुरंधर

The image was taken from Google search.

 

तो फिर से वो मंजिल नजर आई


बड़े दिनों बाद याद तुम्हे मेरी आई,
चलो कुछ नहीं,
आखिर तुम परदे से बाहर तो आई.
हम भी मसरूफ थे,
जाने किस मंजिल को पाने के लिए?
तुम दिखे,
तो फिर से वो मंजिल नजर आई.

 

परमीत सिंह धुरंधर

When I saw your face, I realized my mistake that I had chosen wrong path. My goal is you and I don’t know how I forgot that.

 

चरित्र


उसने मोहब्बत में ऐसे दिया सहारा,
नाम किसी का, और दिल लिया हमारा।
पैसों के खेल में मेरी ही हुई पराजय,
पर चरित्र के मैदान में सबको था पछाड़ा।

 

परमीत सिंह धुरंधर

भाभी


भीड़ तो बहुत थी,
मगर खालीपन दिल का,
दोस्तों के संग मिलने पे मिटा।
खाते ही रहे जीवन भर,
मगर भूख उस शाम,
भाभियों के हाथ से मिटा।

 

परमीत सिंह धुरंधर

The life is complete when it is with friends and family.

पंखहीन परवाज


एक चूहे ने खोद -खोद के,
खोखला पहाड़ कर दिया।
मगर एक चुहिया की आँखों ने,
उसको भी बेचैन कर दिया।
एक कबूतर ने पंख फैला के,
आसमान चुम लिया,
मगर एक मादा कबूतर ने,
उसको भी पंखहीन परवाज कर दिया।
इश्क़ कर तो फिर खुदा की चाह ना कर,
इश्क़ में तो खुदा भी बेबस है।

 

परमीत सिंह धुरंधर

There is no happy end in love.

यूँ आँचल में इमली नहीं छुपाया जाता


हर किसी से रिश्ता नहीं बनाया जाता,
हर शहर को यूँ ही नहीं छोड़ा जाता।
नाली और नहर में अंतर है दोस्तों,
जवानी नहीं आने तक नहर पे नहीं जाया जाता।
बचपन मैंने भी गुजारें हैं,
आम और आवंले के खट्टेपन पे.
जब तक कुछ, कहीं ठहर न जाए,
यूँ आँचल में इमली नहीं छुपाया जाता।
मुझसे शिकायत मत करों मेरे बड़बोलेपन की,
अब सच यूँ सीने में दफनाया नहीं जाता।
हुस्न की महत्वाकांक्षाएं बढ़ रही हैं,
पर्दा, शर्म, चरित्र और पुरुष को मिटाने की,
मेरी कलम से भी अब ये बोझ नहीं उठाया जाता।
मैं यूँ ही बैठा रहूँगा तेरे इंतज़ार में उम्र भर,
मुझे डूबने का गम नहीं,
पर किनारों पर अब नहीं रहा जाता।

 

परमीत सिंह धुरंधर

 

There are some work which one should not do until time comes. However, people like to do that just for the shake of experience but refuse to take the responsibility. They hide and dont like if people point towards it.

मेरा अपना कोई घर क्यों नहीं है?


जो तन्हा कर गए हमें उम्र भर के लिए,
अब बरसों बाद मिले तो पूछते हैं,
मेरा अपना कोई घर क्यों नहीं है?
बहुत मासूमियत है, उनकी आँखों में आज भी,
तभी तो कह रहे थे,
मुझे उनकी तरह बच्चों से प्यार नहीं है.

 

Parmit Singh Dhurandhar

Yesterday, I met her and she asked why do not I have my family yet. With all her innocence, she herself gave the reason within a second that I do not love children like she does.

Life is short


Life is short,
Full of dirt,
Don’t make it greasy.
Use the function rnorm,
Whenever you feel,
You are alone.
And see the plot,
How scatter they are?
Even if they are from,
The same generator.
You can bin them,
And try once again,
They might fall,
This time,
On the diagonal.
Be smart ,
Don’t be choosy.
Life is short,
Full of dirt,
Don’t be greedy.

 

Parmit Singh Dhurandhar