हुस्न


हुस्न की हर नजाकत, एक राज है,
जब पर्दा गिरता है, टूटता ख़्वाब है.

परमीत सिंह धुरंधर

रिश्ते


जिंदगी दो पलों की, बेवफाई उम्र भर का,
रिश्ते यूँ ही नहीं बनते, लहू हो या दिलों का.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मत


किस्मत अच्छी कौन लाया है,
सबने यहीं पे शतरंज बिछाया है.

परमीत सिंह धुरंधर

मेरे साईं


मैं हिन्दू हूँ, मैं पूजता हूँ साईं को भी,
मेरे राम है अवतारी और मेरे साईं भी.
मैं विष्णु का भक्त हूँ और साईं का भी,
मैं ध्यान लगता हूँ शिव का, दिख जाते हैं साईं.
मैं साईं – मंदिर जाता हूँ, मिल जाते है गणपति.
मेरे मन-मंदिर, रोम-रोम में हैं,
शिव, गणेश, राम, कृष्ण, विष्णु और साईं भी.
मेरे घर, द्वार, खेत, खलिहान, सब जगह,
पूजित हैं लक्ष्मी, दुर्गा, पार्वती, सरस्वती और साईं भी.

परमीत सिंह धुरंधर

वादे


कौन कहता है की मैं, मैं नहीं रहा,
सब कहते है अब तू मेरा नहीं रहा.
प्यार में जितने भी वादे हुए,
सब मेरे पास रह गए.
एक भी ऐसा नहीं था की,
तेरे इरादे नहीं हुए.

परमीत सिंह धुरंधर

दीवाना


पतंग जो टूट जाए धागे से,
लौट के फिर उन हाथों से नहीं उड़ता.
ये सच है,
मैं आज भी दीवाना हूँ तेरे हुस्न का,
पर तेरे लौटने की दुआ मैं अब नहीं करता.

परमीत सिंह धुरंधर

सितमगर


सितम बहुत हुई, ए सितमगर,
अब लड़ेंगे हम.
भय, डर कुछ भी नहीं है,
अब कोई समझौता नहीं करेंगे हम.

परमीत सिंह धुरंधर

जिंदगी


कब तक दुवाओं के सहारे,
जिन्दा रहोगे।
कभी जिंदगी में कुछ और भी तो,
आजमाओ।
ये सच है,
दरिया के मौज़ों में मज़ा है बहुत,
पर कभी शांत, स्थिर समुन्दर में,
भी सबकी तो लगाओ।

परमीत सिंह धुरंधर

दिया और चाँद


चाँद मिल जाए तो फिर,
ताउम्र काट जाए चांदनी में.
पर मेरी मान,
रोज नया दिया जलाने में भी नशा है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


यादों की आह,
है मोहब्बत।
कभी देखा है क्या,
पतंगे को साथ रहते हुए.
मोहब्बत में मिटना,
ही है मुक्क़दर।
कभी देखा है क्या,
पतंगे को फिर किस्मत आजमाते हुए.

परमीत सिंह धुरंधर