मोहब्बत:सौ जिस्म को पाने की एक होड़ है


मोहब्बत अब वो महब्बत नहीं,
बस शिकवा-शिकायत है.
सौ जिस्म को पाने की,
बस एक होड़ है.
नारी सौ दहलीज को लांघ कर भी,
जहाँ शर्म से अब भी बंधी है,
ऐसे असंख्य झूठे कहानियों की,
एक किताब है.
झूठे आंसू, झूठे वादे,
झूठे अदाओं से भरपूर,
बेवफाओं की एक दास्ताँ है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

सल्तनत


इस सल्तनत के,
हम सरदार।
एक दिन होगी,
यहां अपनी सरकार।
लोग कहेंगें हमें,
राजकुमार।
और दिन भर बजायेंगे,
हम सितार।
लगातार-लगातार।
अपनी खेतों में होंगे,
ताड़ के पेड़।
लोगों से रखूँगा,
जी हर के बैर।
भर-भर के थालियां,
खाऊंगा,
भर पेट मछलियाँ।
होम मिनिस्टर से प्राइम मिनिस्टर,
सारे लगाएंगे मेरे बिस्तर।
अपनी सेना में होंगे,
बस छुछुंदर।
अति सुन्दर, अति सुंदर।
सेक्सी साइरन से थैन्डर थाई,
सब बनेंगी बस अपनी लुगाई।
फिर तो परमीत की,
होंगी रोजाना आँखे चार।
बारम्बार-बारम्बार।

शहंशाह


इस गुलशन के,
हम गुलफाम है यारों,
जब हम न होंगे तो देखना,
अपना अंजाम मेरे यारों.
शहंशाह वो ही है,
जो गरीबो की दुआ ले,
अमीरों की सौगाते तो,
महफ़िलो में बँटती है.
हमने आज तक,
घूँघट नहीं उठाया,-2
दर्पण में ही उन का,
मुखड़ा देखते हैं.
ये मत पूछो की,
हम क्यों रौशनी से डरते हैं,
आजी अंधकारों में ही,
दियें पलते हैं.
हम कहीं भी रहें,
कितना भी खा लें परमीत,
भूख से बिलखते रहते हैं,
जब तक माँ के हाथ से,
निवाला न मिले.
इस गुलशन के,
हम गुलफाम है यारों,
जब हम न होंगे तो देखना,
अपना अंजाम मेरे यारों.

एक लड़की १६ साल की Crassa की दीवानी हुई……….


एक लड़की १६ साल की Crassa की दीवानी हुई………..

महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी.


महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी..

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