दरजी न बाज आये


दरजी न बाज आये 
अपनी दगाबाजी से. 
नाप ले ला चोली के 
जोबन मल – मल के.

परमीत सिंह धुरंधर

ना मैं किसी चाँद का हुआ


हर शाम जल उठता हूँ चिरागे -दर्द बनकर
ना मैं किसी चाँद का हुआ, ना रात का हुआ.

यूँ मुफलिसी में आ गया हूँ इस कदर
ना मैं किसी घर का हुआ, ना घाट का हुआ.

मत पूछों हाल – जिंदगी मेरी
ना मैं जाम का हुआ, ना पैगाम का हुआ.

वो उजड़ कर भी आबाद हो गयीं
ना मैं मिट्टी का हुआ, ना हवाकों का हुआ.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मतें – जंग


अर्ज किया है
किस्मतें – जंग देखिये।
उनका शहर
और मेरा रंग देखिये।

दौलत से सजी महफ़िलों
की वो चाँद हैं.
उनकी अमीरी की चमक
और मेरी गरीबी का हुनर देखिये।

परमीत सिंह धुरंधर

आई जवानी चढ़-चढ़ के


छोटी सी उम्र में
आई जवानी चढ़-चढ़ के.
कैसे मैं सम्भालूं?
इस पतली कमर पे.

छेड़े हैं हवाएं
लड़ाएं हैं निगाहें।
गली – गली में
बूढ़े भी बढ़-बढ़ के.

दरजी न बाज आये
अपनी दगाबाजी से.
नाप ले ला चोली के
जोबन मल – मल के.

छोटी सी उम्र में
आई जवानी चढ़ – चढ़ के.
कैसे मैं सम्भालूं?
इस पतली कमर पे.

परमीत सिंह धुरंधर

आँसू


ये आँसू मेरी पलकों पे प्रेम के प्यासे हैं
ये कह रहें हैं, हम कितने तन्हा – अकेले हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

कौन है जो पिता बनकर मन को बहलाएगा?


जो दरिया अपना अंदाज बदल ले
तो सागर प्यासा रह जाएगा।

जो भौंरा गर न बहके
तो कलियों का ख्वाब, ख्वाब रह जाएगा।

जिंदगी का ये फलसफा है
कोई, किसी के काम नहीं आएगा।

किस रब से माँगूँ की लौटा दे वो बचपन?
झूले तो बहुत हैं, वो गोद अब नहीं मिल पायेगा।

कितना दर्द है जिंदगी में, किसे सुनाऊँ बैठ कर
कौन है जो पिता बनकर मन को बहलाएगा?

सोचा नहीं था यादें इतना रुलायेंगी
तुम बिन जिंदगी, कृष्ण-बिन-द्वारका सा सूना रह जाएगा।

परमीत सिंह धुरंधर

गीता


हर दर्द का रस पीना है
यही गीता का संदेस है.

विषपान से ही आता
कंठ पे कालजयी तेज है.

जितना तपती है धरती
सींचता उसे उतना ही मेघ है.

हर दर्द का रस पीना है
यही गीता का संदेस है.

परमीत सिंह धुरंधर

काफिर पढ़ने लगें आयतें


तू आँखों से पीला दे
तो जवानी लगे झूमने।
तू घूँघट जो उठा दे
तो काफिर पढ़ने लगें आयतें।
तेरे ही इशारों पे
चल रहें हैं चाँद और तारें।
तेरी एक ही नजर
कलियों को खिला दे.
गूंज रहें भौरें
तेरा ही तराना।
तू बाहों में सुला ले
तो छोड़ दें जमाने की हसरतें।

परमीत सिंह धुरंधर

You flow like a river


You flow like a river
Full of treasures
But you are not in my life
It feels like a looser.
So tell me, tell me, tell me
When will we be together?
To count stars in the sky
To give us another try.

You reflect like pure water
Fresh, sweet and milky color
But you are not in my life
So tell me, tell me, tell me
When will we be together?
To swim and catch fish
To rinse and erase past.

Parmit Singh Dhurandhar

नादाँ हैं भौरें


बड़े नादाँ हैं भौरें
परेशान है भौरें
जाने क्या ढूंढते हैं
जाने कैसा आसमान, भौरें?
इनको पता नहीं है
कलियाँ कितनी चालाक हैं।
ठग लेती हैं सबको
बस खर्चती एक मुस्कान हैं.

बड़े ब्याकुल हैं भौरें
बड़े बेताब हैं भौरें
किसी बनाने को
इनको पता ही नहीं
कलियाँ कितनी चालाक हैं
मासूम बनती हैं
पर दिल की बड़ी बईमान हैं.

परमीत सिंह धुरंधर