वो शहर की हर एक गली में मचली
मगर उनका प्यास फिर भी ना मिट सका
अंत में उनकी फिर ये ही रह गयी शिकायत
उनके अंदर की औरत को कोई समझ न सका.
परमीत सिंह धुरंधर
वो शहर की हर एक गली में मचली
मगर उनका प्यास फिर भी ना मिट सका
अंत में उनकी फिर ये ही रह गयी शिकायत
उनके अंदर की औरत को कोई समझ न सका.
परमीत सिंह धुरंधर
आज भी उनसे मोहब्बत का इरादा रखते हैं
हम इस शहर में अब भी अपना हिस्सा रखते हैं.
वो बेवफा हैं और उनको गुमान भी है इसका
मगर उनकी भी मज़बूरी है
वो चारपाई ही है मेरी
जिसपे वो अपने यार का तकिया रखते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
मैं हूँ एक भारतीय नारी
संस्कारों से भरी
काजल लगाती हूँ आँखों में
और करवा चौथ का व्रत भी रखती हूँ
पर मैं प्रतिव्रता नहीं हूँ
मैं पतिव्रता तो नहीं हूँ.
पूजती हूँ पति को
अपने परमेश्वर मान कर
उनकी एक खांसी पे जगती हूँ रात भर
लम्बी उम्र को उनके
उपवास भी रखती हूँ
पर मैं प्रतिव्रता नहीं हूँ
मैं पतिव्रता तो नहीं हूँ.
हसने – खेलने की कोई
उम्र नहीं होती
जवानी में ही सिर्फ
अंगराई – अटखेली नहीं होती
सांझ ढले उनकी नींदे गहरी हो जाती हैं
लेकिन मैं अब भी चाँद बनकर
बादलों में छूप जाती हूँ.
पर मैं प्रतिव्रता नहीं हूँ
मैं पतिव्रता तो नहीं हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर
माँ
जमाना देखेगा
मेरे रंग को
जब मैं रंग दूंगा
तेरे आँचल को.
अभी तो बहुत पड़ाव
आने बाकी हैं
जहाँ पड़ेंगीं मुझको गालियाँ।
मगर हर पड़ाव पे
जमाना झुकेगा
तेरे चरणों में.
उन्हें धीरज इतना भी नहीं
की मेरे जाने का इंतज़ार कर लें.
वो जिन्हे सिर्फ सोने -जवाहरात
लगाने का शौक है अपने तन से.
वो मुझे गले लगाएं या ना लगाएं
उन्हें एक दिन लगाना होगा
तेरी माटी को अपने तन – मन से.
परमीत सिंह धुरंधर
जो धरा को अब भी अपना धरोहर हमझते हैं
वो जान लें की अब सत्ता पे मोदी बैठें है.
आसान नहीं है उन्हें उठा देना
वो जो आसान पे सम्पूर्ण तपो बल से बैठें हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
रंग जिंदगी में कुछ भी हो
तन्हाई का न हो.
तकलीफ जिंदगी में कुछ भी
बेवफाई का ना हो.
महफ़िल में कोई आये मेरे या ना आये
इंकार तुमसे ना हो.
गले से मेरे कोई लगे या ना लगे
शिकवा तुमसे ना हो.
परमीत सिंह धुरंधर
You are mine
Only mine
I want you in my crime.
I don’t have a house
Nor a bright future ahead
But I need you to move on
In my life.
I can control my breath
But can not control my heart beats
I need you to keep myself alive.
Parmit Singh Dhurandhar
बड़ी भारी भइल बा जोवन
कर अ ता बड़ी जुलम।
तनी देखि ना पतरा पंडित जी
कहिया लागि लगन?
चढ़ल जाता इ उम्र
सूना – सूना जाता हर सावन।
तनी देखि ना पतरा पंडित जी
कहिया लागि लगन?
सारी सखियाँ भइली लरकोरी
झुल अ तारी भरके गोदी
ललचे रहल – रहल हमरो मन.
तनी देखि ना पतरा पंडित जी
कहिया लागि लगन?
परमीत सिंह धुरंधर
ए चाँद मेरी गलियों में
आना – जाना छोड़ दे.
मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का
मुझे ललचाना छोड़ दे.
जिसने धारण किया है
विष को अपन कंठ में
उसके अधरों के पान की
अभिलाषा छोड़ दे.
मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का
मुझे ललचाना छोड़ दे.
भूत – भभूत – डमरुँ
पे जो रीझ जाए
उसपे नयनों के
तीर चलाना छोड़ दे.
मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का
मुझे ललचाना छोड़ दे.
जब – जब आस टूटती है
मानव की
तब प्रभु शिव हरते हैं
पीड़ा भक्तों की.
मुझे ऐसी भक्ति से
भटकाना छोड़ दे.
मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का
मुझे ललचाना छोड़ दे.
मुझसे भी बलिष्ठ और कर्मनिष्ठ
बहुत है यहाँ।
इस अवघड-फ़कीर को
आजमाना छोड़ दे.
मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का
मुझे ललचाना छोड़ दे.
परमीत सिंह धुरंधर
चोलिया के हमारा
मसकअता सियनवा।
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो लूट जाइ सारा जोवनवा
बलम, गवनवा करा द ना.
सबके लागल बा हमपे नयनवा
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो टूट जाइ धीर के बाँधवा
बलम, गवनवा करा द ना.
मुखिया चाहअता हमसे मिलनवा
बलम, गवनवा करा द ना.
भइल मुश्किल बा खेळल अब फगुआ
बलम, गवनवा करा द ना.
जवार सारा, चाहे पकड़े के कलइया
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो टूट जाइ ना त हमरो चारपाइयाँ
बलम, गवनवा करा द ना.
फ्रांस जीत ले गइल विश्व ख़िताबवा
बलम, गवनवा करा द ना.
हेमा ले अइली जीत के सोना के मेडलवा
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो टूट जाइ हमरो नथुनिया
बलम, गवनवा करा द ना.
परमीत सिंह धुरंधर