Instagram


विद्रोही कलम ही सिर्फ Bold हो सकती है,
बाकी उनकी Boldness तो सिर्फ Instagram पे ही दिखती है.

 

Just by posting your pic on the Instagram, you can not show your boldness or courage. A courageous  person has to be on the road to fight for the poor people.

 

Parmit Singh Dhurandhar

खुले खेतों में मेरी रानी


मैं गलियों का हूँ शहजादा,
तू महलों की रानी।
थोड़ा इश्क़ करेंगे परदे में,
थोड़ा बे-पर्दा मेरी रानी।
शर्म – हया हैं तेरी आँखों में,
और मेरी बेशर्म जवानी।
थोड़ा इश्क़ करेंगे बंद कमरे में,
थोड़ा खुले खेतों में मेरी रानी।
मैं नहीं रुक सकता रातों का अँधेरा छाने तक,
मैं नहीं संभल सकता तेरा दिया बुझाने तक,
थोड़ा इश्क़ करेंगे अंधेरों में,
थोड़ा नहरों पे मेरी रानी।

 

परमीत सिंह धुरंधर

एक फूल तो मेरे आँगन में रख


तू दरिया – दरिया आके मुझसे तो मिल,
मैं सागर – सागर तेरी मोहब्बत में चख लू.
तू एक फूल तो मेरे आँगन में रख,
मैं तेरे लिए सारा मरुस्थल सींच दूँ.

 

परमीत सिंह धुरंधर

सौभाग्य


खूबसूरत जिस्म पे कभी उनके,
मेरा भी हाथ था.
अब कहती हैं,
क्या ये मेरा कम सौभाग्य था.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हर रात बदल जाता है खाट उनका


मेरा दिल तोड़कर,
उनका अंदाज देखिये,
सारे शहर में हैं अब जलसा उनका।
बहुत खूबसूरत हैं,
ये ही, नाज है उन्हें,
हर रात बदल जाता है खाट उनका।

 

परमीत सिंह धुरंधर

Be a noisy girl


Be a wild girl,
Not a shy girl.
Life is short,
And night is dark.
Let me feel,
That you have a spark.
Why do you want,
To close your eyes?
Don’t be edgy,
When I am with you.
Be a noisy girl,
Not a wise girl.
Life is short,
And night is dark.
Let me feel,
That you have a spark.

 

Parmit Singh Dhurandhar

It’s in my vein


A guy like me,
Make you feel baby,
Make you feel.
Just try once,
If you don’t believe.
A guy like me,
Make you feel baby,
Make you feel.
Just one kiss,
And you will melt.
It’s not me,
It’s in my vein.
In my arms,
All your pains will fade,
And your wounds will heel.
A guy like me,
Make you feel baby,
Make you feel.
Each hour,
That you will be with me,
Will be like a full life,
And, your dream.
A guy like me,
Make you feel baby,
Make you feel.

 

Parmit Singh Dhurandhar

भिखारी – मदारी


दाने – दाने पे,
उसने मेरा नाम लिख दिया।
यह मेरी किस्मत नहीं,
ना भाग्य है.
बल्कि ऐसा करके,
उसने मुझे भिखारी,
और खुद को मदारी लिख दिया।
मैंने भी गमझे से पेट में,
विकराल होते भूख को,
बाँध दिया।
दुपहरी में पीपल के नीचे,
खाट डाल के लेट गया.
मुझे मेरी गरीबी में भी खुसी हुई,
की आज मैंने,
उसके ऊँचे महलों के दर्प,
को बुझा दिया।

 

परमीत सिंह धुरंधर

पापा आप मेरी मदिरा थे


पापा – वो – पापा,
आप मेरा ख्वाब थे.
खुले बगीचे में,
बादल की बूंदों सी,
मिठास थे आप,
मेरी जिंदगी का.
हरी घास पे,
नन्ही बूंदों सी,
नयी सुबह थे आप,
मेरे हर सपने का.
पापा – वो – पापा,
आप मेरा ख्वाब थे.
आप गंगा थे मेरे,
मैं किनारों का पत्थर।
डूब कर आपकी धाराओं में,
चमक उठा जिसका कण – कण.
आप हिमालय थे मेरा,
जिसकी घाटी में,
पुलकित हुआ,
और प्राप्त किया,
दुश्मनों की आँखों में खलने वाला,
मैंने ये योवन।
पापा – वो – पापा,
आप मेरी बुलंदी थे.
पापा, आप मेरी वो मदिरा थे,
जिसका नशा,
आज तक उतरा नहीं।
जिसके आगे कोई और,
जाम नहीं।
जिसके स्वाद में,
आज तक साँसों की,
प्यास मिटती नहीं।
मैं अपना मोक्ष भी,
ठुकरा दूँ,
बैंकुठ भी ठुकरा दूँ,
बस आपकी गोद,
और दुलार की खातिर।
पापा – वो – पापा,
आप मेरी साहस थे,
मेरी दौलत थे.

 

परमीत सिंह धुरंधर

सिंह सा दहाड़ लेता है


जिंदगी ने हर तरफ से तन्हा कर दिया,
उमीदों के हर किनारे को तोड़ कर,
बे- आसरा कर दिया।
फिर भी नशों में बहता ये खून,
जो राजपूती है,
उछाल लेता हैं,
उबाल लेता है.
संकट के हर घड़ी पे,
ये सिंह सा दहाड़ लेता है.
मैं मिटने की राह पर रहूँ,
साँसे टूटने की कगार पे रहे.
छाने लगते हैं जब भी,
हार की आंशका के ये काले बादल।
गिरते – गिरते भी, धूल में धूसरित होते भी,
ये खून, दुश्मनों को ललकार देता है.
मुझमे फिर से अहंकार भर,
जोश भर,
आखिरी क्षणों में भी,
राण-भूमि में, अरुंओं के सम्मुख,
नाव-योवन प्रदान करता हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर