सास-पतोह


बिगड़ैल हमार पीया एक नंबर के बदमाश
सासु कहस, “पतोहू तानी ठंढा कर अ आग”
हमसे ना सम्भले हमार ही जामल त
कैसे संभाली सासु राउर जामल हाँ?

पियक्कड़ हमार पीया एक नंबर के चसकल
सासु कहस, “पतोहू तानी कस के रख अ लगाम”
हमसे ना सम्भले हमार ही जामल त
कैसे संभाली सासु राउर जामल हाँ?

परमीत सिंह धुरंधर 

जब से जवान भइल बारू


जब से जवान भइल बारू
धनिया से धान भइल बारू।
पहिले रहलू तू बोरसी के आग
अब लहकत अलाव भइल बारू।

जब से जवान भइल बारू
धनिया से धान भइल बारू।
पहिले रहलू तू सरसो के तेल
अब ठंढा हिमताज भइल बारू।

परमीत सिंह धुरंधर

चोली रंगाई ए गोरी


बाँध अ मत ऐसे जोबना ए गोरी
हाहाकार मच गइल बा देख तहार ढोंढ़ी।
आइल बारन छपरा के धुरंधर मैदान में
त आज तहार चोलिया रंगाई ए गोरी।

आरा – बलिया से बच गइलू
मगर आ गइलू नजरिया में
माहिर छपरा के धुरंधर के
त आज छपरा में नकिया छेदाइ ए गोरी।

अभी बाली बा उमर, येही पर त चढ़ी रंग
जतना उड़ेल बारू, उड़ ला
दाना जी भर के चुग ला
त आज पंखिया तहार कटाई ये गोरी।

परमीत सिंह धुरंधर 

जब से जवान भइल बारू-2


जब से जवान भइल बारू
धनिया से धान भइल बारू
पहिले धामिन रहलू तू
अब गेहुंअन भइल बारू।

डस अ तारु
खेता – खेता चढ़ के
खलिहान – बथान में
केंचुल छोड़तारु।

परमीत सिंह धुरंधर

हमर सैया जी


बकरिया चरावे गइलन हमर सैया जी
बकरिया के पीछे हमें भूल गइलन जी.
कोई जाके ढूंढे कहाँ गइलन जी?
भरल जवानी में हमें छोड़ गइलन जी.

परमीत सिंह धुरंधर 

खर्चा उठा ली


सारी नगरिया में चर्चा बा रउरे आमदनी के
सुनी ए बाबूसाहेब छपरा के धुरंधर
खर्चा उठा ली हमर जवनिया के.

हमरा खूंटा से कउनो गाय ना तुराईल आज तक
फंस जइबू रानी, रहे के पड़ी
साड़ी उम्र फिर संगे कोठारिया में.

परमीत सिंह धुरंधर

सैया छिलह तारान


सैया छिलह तारान आज कल दही पर के छाली
करके हमके लरकोरी, खुद भइल बारन मवाली।

खेता – खेता, गाछी – गाछी, सुस्ता तारान खटिया डाल के
और यहाँ सुलग ता रात – रात भर हामार छाती।

डर ता जियरा की कहीं नवे महीना में
लेके मत आ जाइ अंगना में दूसर घरवाली।

परमीत सिंह धुरंधर