चाहत


तेरी पलकों में जी लूँ,
मैं अपने सपनों की साँसे.
मेरी पलकों में तू रख दे,
अपनी साँसों के सपनें.
अँधेरी राहों में तू चले,
मेरी बाहों को थाम के.
तेरी बाहों के सहारे,
मैं काटूं जीवन के अपने अँधेरे.
तेरे ख़्वाबों को,
मैं हकीकत बना दूँ.
तू मेरे हकीकत में,
ख़्वाबों का रंग भरें.

परमीत सिंह धुरंधर

प्यार


प्यार उनसे मत कर जो तुझे दुनिया में अकेला कर दें,
प्यार उनसे कर जो अकेले हों दुनिया में तेरे बिना।

परमीत सिंह धुरंधर

दिलरुबा


अभी- अभी तो दिल तोड़ा है,
तेरे नैनों के मयखाने में.
फिर क्यों पूछती हो दिलरुबा,
हाल मेरा इस जमाने से.
बदल लिया है परमीत ने धड़कनो को,
तेरी खुशियों की खातिर.
फिर क्यों हो इतनी आतुर,
आने को मेरे जनाजे में.

बेवफा


प्यार बिकता है इतना भी,
मैंने जाना न था हाँ कभी,
वो साड़ी में थीं मेरे,
पहने पायल किसी और की.
जिनकी तस्वीर सजाता था,
दीवारों पे अपने,
वो बाहों में थी मेरे, परमीत
सपने सजायें किसी और की.