तेरे अंगो से इतना लगे हैं,
तन्हाई में मुस्करा रहें हैन.
तू काट ले जिसके संग भी जीवन,
अपने नसीब पे हम भी इतर रहें हैं परमित.
तेरे अंगो से इतना लगे हैं,
तन्हाई में मुस्करा रहें हैन.
तू काट ले जिसके संग भी जीवन,
अपने नसीब पे हम भी इतर रहें हैं परमित.