वो जिनकी याद में दिल ने आघात कर दिया….


मयखानों से दूर,

मस्तानों से भी दूर,
ये शाम ढल रही ,
तन्हाई में मसरूफ.
बीते साल में वो मेरे साथ थीं,
अपनी जुल्फों की जंजीर में मुझको बांधके.
मेरे दर्द को, मेरे गम को,
जो पिघला जाती थीं,
अपने अधरों के ताप से.
की,
जिन्दगी में एक नया साल आ गया,
कोई मिलता ही नहीं जो सुने परमित इस दीवाने की.

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