घरवाली


रात बड़ी काली है,
साथ घरवाली है,
आँखे लड़ाऊँ,
या चुपचाप सो जाऊं मैं.
पानी बरस रहा है,
छम-छम करके,
बिजली भी चमकती है,
रह-रह के,
छनका दूँ मैं इनके
पायल पावों में,
या चुपचाप सो जाऊं मैं.
आज ही आयीं हैं,
अपने मायके से,
नयी साड़ी में,
सज-धज के,
लोरी सुनाऊँ आज,
प्यार के साड़ी रात,
या चुपचाप सो जाऊं मैं, परमीत

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