सदियाँ गुजर गयीं,
वो दर्द ना मिटा।
ओठों का तेरे अब तक,
वो रंग ना मिटा।
मेरे खवाबों में आते हैं,
अब भी वो तारें।
जिनके चाँद का,
वो दाग ना मिटा।
कैसे संभाले कोई जीवन को?
नागिन का विष उतर भी जाए तो.
हाय, तन से अभी तक,
उस दंश का ताप ना मिटा,
रे ताप ना मिटा।
परमीत सिंह धुरंधर
Waah!!
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Ashu bhai…you are the first one who liked so many of my posts and also commented…..koi nahi aaj tak kiya itna thanks a lot Ashu bhai
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