जिसे जिंदगी भर ग़मों ने लुटा,
उसके मुस्कराने का अंदाज तो देखो।
आंसूं निकलते भी हैं आँखों से,
तो उनके निकलने का अंदाज तो देखो।
कौन नहीं है?
जिसने नहीं कहा अपने जीने के अंदाज को.
मगर जब ये कहें,
तो इनके कहने का अंदाज भी तो देखो।
परमीत सिंह धुरंधर