हम वो हैं जिसको चुना है देवों ने,
हम तो वो हैं जिसको सहा है देवों ने.
जब ग्रसित हुईं अभिमान से इंदिरा,
तो एक बृद्ध चला था जगाने गावं -गांव को.
हंस रहा था जब पूरा उत्तर प्रदेश उस पर,
तब सहारा दिया था बिहार के नौजवानों ने.
ज्ञान में हमने दिया मिथिलांचल,
शान उसकी क्या सहेगा कोई पूर्वांचल?
शंकराचार्य को परास्त किया था इसी आँगन में,
गांधी को भी दिया था हमने अभिमान इसी चम्पारण में.
जब उतरने को थी धरती पे गंगा,
बोली, इसी बिहार से जाउंगी।
जानकी भी बोली राम से, तभी बनूँगी आपकी,
जब डोली मिथिला से जायेगी।
दिनकर की आवाज यही से, नागार्जुन का तेवर यही से,
राजेंद्र प्रसाद से चंद्रशेखर,
हर बगावत की शुरुआत यही से.
बुद्ध, महावीर, गुरु गोबिंद यही के,
फिर किस पे इतना दम्भ तुम्हे?
चन्द्रगुप्त, आज़ाद शत्रु, अशोक यही के,
इतहास से वर्तमान तक कोई नहीं है हमसे आगे.
बिहार को तुच्छ समझने वालों,
तुच्छता का प्रमाण यही ही,
की हर वार पड़ी है धर्म की नीवं यही पे.
परमीत सिंह धुरंधर