मुझे दर्द भी है,
मुझे इश्क़ भी है,
खुदा तू बता दे,
मुझे नशा क्यों नहीं है?
आँखों में ख्वाब भी,
आँखों में अश्क भी,
खुदा तू बता दे,
नींद क्यों नहीं है?
ये काँटे भी मेरे,
ये कलियाँ भी मेरी,
खुदा तू बता दे,
ये बाग़ मेरा क्यों नहीं है?
ये राहें भी मेरी,
ये मंजिल भी मेरा,
खुदा तू बता दे,
ये सेहरा मेरा क्यों नहीं है ?
ये सल्तनत भी मेरी,
ये तख़्त भी मेरा,
खुदा तू बता दे,
ये ताज मेरा क्यों नहीं है?
ये लोग भी मेरे,
ये गलियाँ भी मेरी,
खुदा तू बता दे,
ये महफ़िल मेरी क्यों नहीं है?
परमीत सिंह धुरंधर