पौरष


जीवन वही है,
जिसमे धाराएं हों.
पेड़ वही है,
जिसमे शाखाएं हों.
नारी वही है,
जिसमे वफ़ाएं हों.
कब तक सोओगे गहरी निंद्रा में,
पौरष वही जिसके पथ में बाधाएं हों.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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