दुआएं और दवाएं बेकार गयीं


अश्कों के ढेर के नीचे,
हूँ मैं दबा हुआ.
किसी ने आग लगाने की कोसिस की,
और उसकी सारी तीलियाँ बेकार गयीं।

इस कदर दिल टुटा है मेरा,
की दोस्तों की दुआएं और सारी दवाएं,
सब बेकार गयीं।

 

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment