लैला – मजनू


मेरे सीने पे चोट हो,
और दर्द उनके सीने पे.
ऐसा इश्क़ अब कहाँ?
लैला रो दे मजनू के गिरने पे.

 

परमीत सिंह धुरंधर

2 thoughts on “लैला – मजनू

Leave a comment