अभिमान – अहंकार


जब पुत्र ही हूँ मैं धुरंधर सिंह का,
तो अभिमान मेरे मस्तक पे है.
और शिष्य ही रहा हूँ जब,
सीताराम – कास्बेकर का,
तो अहंकार मेरे नस – नस में है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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