वक्षों पे पसीना


कहीं सीने में दिल है,
कहीं दिल पे सीना,
बड़ा कातिल है गोरी,
तेरे वक्षों पे पसीना।

कहीं जीने में मुश्किल है,
कहीं मुश्किल है जीना,
बड़ा कातिल है गोरी,
तेरे वक्षों पे पसीना।

कभी मन का सकुचाना,
कभी मन का बहकना,
बड़ा कातिल है गोरी,
तेरे वक्षों पे पसीना।

ये मंजर वही है,
जिसके पीछे है जमाना,
बड़ा कातिल है गोरी,
तेरे वक्षों पे पसीना।

ना बाँध चोली कसके ऐसे,
मुश्किल हो जाता है,
धड़कनो को रोकना।
बड़ा कातिल है गोरी,
तेरे वक्षों पे पसीना।

 

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment