मेरी चोली कह रही है


मुझे तुमसे मोहब्बत का
हर साल इरादा है.
मेरी चोली कह रही है
तू इसका धागा है.

खुद ही सिलूँगी
खुद ही टाकुंगी।
तुझे सबसे छुपा के रखने का
ये ही अच्छा बहाना है.

मेरे अंग-अंग से खेल
तू भ्रमर सा गुनगुना के.
मेरा यौवन कह रहा है
तू इसका नशा है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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