दर्द में हर दिल का पैगाम लीजिये
मुस्करा कर ना सही
फिर भी आँखों से सलाम लीजिये।
मिल गए है कई साथी नए राहों में
पर पुराने खिदमतगारों का अपने
नजरें – करम लीजिये।
माना की पर्दा जरुरी है
पुराने दरकते दीवारों पे
मगर कभी तो
इन चारदीवारों में भी बैठ लीजिये।
परमीत सिंह धुरंधर