Crassa किताब ही नहीं रखता


कौन है जो किताबों में तस्वीर नहीं रखता?
ये बस Crassa है जो किताब ही नहीं रखता।

वो उम्र भर की मोहब्बत जो ना मिल सकी
उन्हें भी पता है की मैं कोई और चाहत नहीं रखता।

बहुत खौफ में है ये शहर
की हर कोई अनजान है लगता.

दिल इस कदर डूबा हूँ दर्द में
की दूर – दूर तक कुछ और नहीं दिखता।

परमीत सिंह धुरंधर

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