जन्नत लुटाने को तैयार है खुदा


तुझे जवान करके, परेशान है खुदा
जिस रात से देखा है, हैरान है खुदा।

क़यामत लाने वाला, जाने कब लाएगा?
मगर आज क़यामत का शिकार है खुदा।

तेरे अंगों पे जब फिसलते हैं बादल की बूंदें
तो अपनी ही किस्मत पे शर्मशार है खुदा।

जन्नत खुद के लिए, और गरीबी इंसानों को दे दी
तेरे अंगों को चूमने के लिए, जन्नत लुटाने को तैयार है खुदा।

परमीत सिंह धुरंधर

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